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FII Buying Indian Stock Market: दो महीने की सबसे बड़ी खरीदारी, रुपये की मजबूती से लौटाया विदेशी निवेशकों ने भरोसा

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भारतीय शेयर बाजार के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। जिस संकेत का निवेशकों को लंबे समय से इंतजार था, वह अब दिखने लगा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने बीते सप्ताह भारतीय शेयरों में करीब 644 मिलियन डॉलर की जोरदार खरीदारी की है। यह आंकड़ा अक्टूबर के मध्य के बाद से अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। यह जानकारी Bloomberg द्वारा संकलित आंकड़ों पर आधारित है।

यह मजबूत खरीदारी ऐसे समय देखने को मिली है, जब भारतीय रुपया हालिया दबाव से उबरता नजर आया। इससे पहले के तीन हफ्तों में विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से लगभग 1.8 बिलियन डॉलर की निकासी की थी। उसी दौरान रुपया भी एक प्रतिशत से ज्यादा कमजोर होकर रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था।

हालांकि जैसे ही रुपये में सुधार शुरू हुआ, विदेशी निवेशकों का रुख भी बदल गया। पिछले हफ्ते रुपया करीब छह महीनों की सबसे मजबूत साप्ताहिक तेजी दर्ज करने में सफल रहा। इसी मजबूती ने विदेशी निवेशकों का भरोसा लौटाया और उन्होंने एक बार फिर भारतीय इक्विटी मार्केट में पैसा लगाना शुरू कर दिया।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि विदेशी निवेशक अपने रिटर्न को डॉलर के लिहाज से देखते हैं। ऐसे में जब रुपया कमजोर होता है, तो शेयर बाजार में मुनाफा होने के बावजूद डॉलर में बदलने पर रिटर्न घट सकता है। यही वजह है कि रुपये में गिरावट के समय विदेशी निवेशक सतर्क हो जाते हैं और बिकवाली बढ़ा देते हैं।

इसके उलट, जब रुपये में स्थिरता या मजबूती आती है, तो विदेशी निवेशकों का आत्मविश्वास बढ़ता है। हालिया आंकड़े भी इसी ट्रेंड की पुष्टि करते हैं। रुपये में सुधार के साथ न सिर्फ बिकवाली रुकी, बल्कि नई खरीदारी भी शुरू हो गई।

इससे संकेत मिलता है कि अगर आने वाले समय में रुपये में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं होता है, तो भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेश बना रह सकता है। हालांकि अगर दोबारा रुपये पर दबाव बढ़ता है, तो विदेशी निवेशकों की रणनीति फिर बदल सकती है।

कुल मिलाकर, ताजा एफआईआई खरीदारी यह साफ दिखाती है कि अब भारतीय बाजार की कहानी सिर्फ ग्रोथ और वैल्यूएशन तक सीमित नहीं रह गई है। रुपये की मजबूती और करेंसी स्टेबिलिटी विदेशी निवेशकों के लिए भरोसे का सबसे बड़ा आधार बन चुकी है। आने वाले हफ्तों में सभी की नजर रुपये की चाल पर टिकी रहेगी और उसी के साथ यह तय होगा कि विदेशी निवेश की रफ्तार आगे कितनी मजबूत रहती है।

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ANAND SRIVASTAVA--DIRECTOR & CHIEF EDITOR....NOMINI--PADAMBHUSHAN AWARD-2012, PADAMVIBHUSHAN AWADRD -2017..

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