022 में होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। जिसे बसपा का 2.0 यानी नया अवतार कहा जा रहा है। दरअसल, मायावती मान चुकी हैं कि सिर्फ बहुजन के सहारे सत्ता नहीं हासिल की जा सकती। उन्हें नए जमाने के साथ कदम ताल करते हुए आगे बढ़ना होगा। लगभग 65 साल की मायावती ने 5 बड़े बदलावों के संकेत दिए हैं।
इसके समझने के लिए कुछ अतीत में झांकना होगा। 4 अप्रैल 1984 को कांशीराम ने बसपा की स्थापना की थी। हालांकि 2007 में सोशल इंजीनियरिंग के सहारे मायावती पूर्ण बहुमत के साथ यूपी की सत्ता में काबिज हुईं। इससे पहले उनके विवादित नारे तिलक, तराजू और तलवार…कुछ ज्यादा कमाल नहीं कर पाए। बाद में यह नारा हाथी नही गणेश है, ब्रह्मा विष्णु महेश है…के नारे तक पहुंचा। लेकिन 2012 और 2017 के चुनावों में बड़ी हार के बाद मायावती अब समझ चुकी हैं कि 36 साल पुरानी पार्टी को रिफॉर्म करना होगा। यदि बदलाव नहीं किए तो लगातार तीसरे चुनाव में भी हाथी उठ नहीं पाएगा।



