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माघ मेला–2026 : माघी पूर्णिमा स्नान पर्व एवं कल्पवासियों की सकुशल वापसी के दृष्टिगत पुलिस आयुक्त की अध्यक्षता में ब्रीफिंग

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माघ मेला–2026 के अन्तिम प्रमुख स्नान पर्व माघी पूर्णिमा (दिनांक 01.02.2026) के अवसर पर मेला क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन तथा कल्पवासियों की सकुशल वापसी सुनिश्चित किए जाने के उद्देश्य से आज दिनांक 30.01.2026 को पुलिस आयुक्त, कमिश्नरेट प्रयागराज श्री जोगिंदर कुमार की अध्यक्षता में रिज़र्व पुलिस लाइन्स, माघ मेला स्थित तीर्थराज सभागार में ब्रीफिंग आयोजित की गई।

पुलिस आयुक्त, कमिश्नरेट प्रयागराज श्री जोगिंदर कुमार द्वारा अपने संबोधन में कहा गया कि माघी पूर्णिमा स्नान पर्व माघ मेला–2026 का अत्यंत महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील चरण है, जिसमें श्रद्धालुओं की संख्या, कल्पवासियों की वापसी तथा वाहनों की आवाजाही एक साथ संचालित होगी। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि इस अवधि को रूटीन ड्यूटी न मानते हुए पूर्ण सतर्कता, अनुशासन एवं जिम्मेदारी के साथ कार्य किया जाए।

       उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि ड्यूटी पर तैनात समस्त बल से प्रत्येक ड्यूटी अवधि में दो बार अटेंडेंस शीट पर हस्ताक्षर कराए जाएं तथा किसी भी स्तर पर अनुपस्थिति या शिथिलता स्वीकार्य नहीं होगी। दिनांक 31.01.2026 को प्रातः 05:00 बजे पुलिस आयुक्त द्वारा वायरलेस सेट के माध्यम से पुनः ब्रीफिंग की जाएगी, जिसमें संबंधित अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों की अद्यतन स्थिति से अवगत कराएंगे। यातायात डायवर्जन को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू करने, पैदल श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने तथा किसी भी प्रकार की अव्यवस्था की स्थिति में त्वरित समन्वय से समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

        अंत में पुलिस आयुक्त द्वारा समग्र निर्देश देते हुए कहा गया कि सभी अधिकारी एवं कर्मचारी कर्तव्यनिष्ठा, संयम एवं संवेदनशीलता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करें। किसी भी परिस्थिति में कानून-व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण एवं श्रद्धालुओं की सुरक्षा से समझौता न किया जाए। सभी इकाइयाँ आपसी समन्वय एवं टीम भावना के साथ कार्य करें, ताकि माघी पूर्णिमा स्नान पर्व एवं कल्पवासियों की वापसी पूर्णतः सकुशल, सुरक्षित एवं व्यवस्थित रूप से सम्पन्न कराई जा सके।

इस अवसर पर अपर पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था/मुख्यालय), पुलिस अधीक्षक माघ मेला, मेलाधिकारी, पुलिस उपायुक्त नगर, पुलिस उपायुक्त गंगानगर, पुलिस उपायुक्त यमुनानगर सहित पुलिस, प्रशासन एवं अन्य इकाइयों के अधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे।

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माफिया और अराजकतत्वों ने रोकी ऐतिहासिक बाबा देवघाट महादेवन धाम ब्यूरोप्रतापगढ़। लखनऊ-वाराणसी राजमार्ग के समीप स्थित ऐतिहासिक बाबा देवघाट महादेवन धाम भक्तों की आस्था का केन्द्र बना हुआ है। मुख्यालय से महज 11 किमी दूर पर स्थित मोहनगंज बाजार से उत्तर दिशा में सई नदी तट पर स्थित है। ऐतिहासिक यह धाम बाबा देवघाट धाम, बाबा महादेवन धाम, बाबा बालेश्वर नाथ धाम, बाबा बालेश्वर नाथ अवध धाम आदि नामों से जाना जाता रहा है। सई नदी से लगभग 30 फिट ऊंचाई पर स्थित इस धाम का वर्णन श्री राम चरित मानस में है। “प्रथम दिवस तमसा तट वासु, दूजे गोमती तीर निवासु और सई तीर वसि चले विहाने, श्रृंगवेरपुर सब निअ राने”। भगवान प्रभु राम अपने भ्राता लक्ष्मण और पत्नी सीता के साथ वनवास को जाते समय सई नदी के तट पर रात्रि विश्राम के बाद सुबह भगवान राम ने प्रभु शिव की बालू की शिवलिंग बनाकर उनकी पूजा अर्चना के उपरांत श्रृंगवेरपुर के लिये प्रस्थान किये। बाबा देवघाट महादेवन धाम सेवा संस्थान (पंजीकृत) के अध्यक्ष शील कुमार सिंह गहलौत ने बताया कि प्रशानिक अधिकारियों, क्षेत्रीय पर्यटक अधिकारी व शासन स्तर पर घोर लापरवाही की गई है। जो भी विकास कार्य इस धाम का हुवा है वह श्रद्धालुओं एवं भक्तों के द्वारा ही किया गया है। बाबा देवघाट महादेवन धाम के महंत पुजारी रामानन्द गिरी महाराज ने बताया कि इस ऐतिहासिक धाम को कब्जाने की मंशा में आधा दर्जन से अधिक संस्थाएं बनी। इसी में एक संस्था के अध्यक्ष एवं सचिव ने मिलकर मंदिर के लगभग तीन कुंतल घंटों मोहनगंज बाजार के व्यापारी के हाथ एक लाख साठ हजार रुपए में बेंच कर उस धन का दोनों बंदरबांट कर खा जाएं। इधर शिवलिंग पर चांदी का कवच लगवाने के नाम पर अब तक दस किग्रा से अधिक चांदी अब तक भक्तों के। द्वारा आ चुकी है। लेकिन अब भी कवच लगवाने के लिए कम बताया जा रहा है। आगे महाराज ने बताया कि निवर्तमान सांसद संगम लाल गुप्ता ने धर्मशाला निर्माण के लिए व्यक्तिगत रूप से दस लाख रुपए तथाकथित सचिव और पुजारी को दिया गया जिसका भी दोनों लोगों ने मिलकर खेला कर दिया है। जो भी कक्ष का निर्माण हुआ है वह जनता के पैसे से हुआ है। क्षेत्रीय व्यापारी विजय कुमार गुप्ता ने बताया कि कुछ साल पहले इस धाम पर अराजक तत्तों का भी दबदबा इस धाम पर होने लगा। जिससे श्रद्धालुओं को काफी असुविधा होने लगी। और धीरे धीरे इस धाम से भक्तों का आना जाना कम होने लगा। पुजारी राम आसरे गिरी महाराज ने बताया कि इस ऐतिहासिक धाम पर भक्तों के द्वारा भंडारा आदि से लेकर तरह तरह के प्रयोजन होते रहे है। बाबा बालेश्वर नाथ अवध धाम सेवा संस्थान (पंजीकृत) 2007 में मलमास के दौरान संस्थान की ओर से अध्यक्ष शील कुमार सिंह गहलौत के नेतृत्व में एक माह का ओम नमः शिवाय का जाप व ऐतिहासिक भंडारा व अन्य प्रयोजन कराया गया जो आज भी भक्तों को बार बार याद दिलाता है। इस जाप स्थल पर आधी रात को शिवलिंग से नाग व बिच्छू आदि निकल कर हो रहे जाप स्थल के आस पास बैठ जाते थे। जिसको देखने के लिए आधी रात को भक्तों का मजमा लगा रहता था। मंदिर की बेहतर देखरेख विकास कार्य उक्त संस्थान के नेतृत्व में किया जा रहा था पर कतिपय अन्य संस्था के लोगों द्वारा सोसाइटी में आपत्ति लगाने के चलते बेहतर कार्य कर रही समिति प्रभावित किया जाता रहा। इसी बीच शासन प्रशासन से मिलकर कतिपय अन्य लोगों ने अधिपत्य स्थापित करने का प्रयास किया। और भक्तों के चंदे का जमकर बंदरबांट किया जाता रहा। बीस वर्षों तक सोसाइटी में तारीख पर तारीख की पेशी के उपरांत अंततः बाबा बालेश्वर नाथ अवध धाम सेवा संस्थान को नाम और पता परिवर्तित करते हुए बाबाब देवघाट महादेवन धाम सेवा संस्थान का प्रमाणपत्र जारी कर मंदिर के समुचित विकास का कार्य करने का आदेश प्रदान कर दिया गया है। सोसाइटी द्वारा मंदिर के पुराने नाम से संस्था को प्रभावी करने की खुशी में भक्त अरुण शुक्ला, सुभाष शुक्ला, सोनू सिंह, अजीत सिंह आदि तमाम लोगों ने खुशी जाहिर की है। लोगों का मानना है कि अब एक बार फिर से बाबा देवघाट महादेवन धाम सेवा संस्थान के नेतृत्व में समुचित विकास का कार्य होगा। वहीं भक्तों को भी बेहतर सुविधा मुहैया कराने का सार्थक प्रयास सफल भी होगा।
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ANAND SRIVASTAVA--DIRECTOR & CHIEF EDITOR....NOMINI--PADAMBHUSHAN AWARD-2012, PADAMVIBHUSHAN AWADRD -2017..

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