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झूंसी शिफ्ट हुए बस स्टेशन से बढ़ी यात्रियों की मुश्किलें, मनमाने किराये से लोग परेशान

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सिविल लाइंस स्थित रोडवेज बस स्टेशन को झूंसी में अंदावा के पास स्थायी रूप से स्थानांतरित किए जाने के बाद यात्रियों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। सोमवार को दूसरे दिन भी हालात सामान्य नहीं हो सके और बड़ी संख्या में यात्रियों को झूंसी रोडवेज तक पहुंचने में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

बस स्टेशन शिफ्ट होने के कारण सिविल लाइंस और आसपास के इलाकों से झूंसी तक जाने के लिए यात्रियों को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। इस स्थिति का फायदा उठाते हुए ऑटो, ई-रिक्शा और बाइक सवारों ने मनमाना किराया वसूलना शुरू कर दिया है। कई यात्रियों से सामान्य किराए के मुकाबले दो से तीन गुना तक पैसे लिए जा रहे हैं।

रामबाग निवासी बाबूराम गुप्ता और कीडगंज के शिव श्याम चौरसिया परिवार के साथ गोरखपुर जाने के लिए पहुंचे थे। उनका कहना है कि झूंसी तक पहुंचने के लिए ऑटो चालक ने 400 रुपये की मांग की, जबकि यह किराया कई बार बस यात्रा से भी ज्यादा है। इसी तरह गोपीगंज जाने वाले यात्रियों ने बताया कि जहां बस का किराया 89 रुपये है, वहीं झूंसी पहुंचने के लिए 200 रुपये तक देने पड़ रहे हैं। परिवार के साथ सफर करने वालों का खर्च 500 से 600 रुपये तक पहुंच रहा है।

सिटी बसों में भी हालात बेहतर नहीं रहे। बसों में इतनी भीड़ रही कि यात्रियों के लिए चढ़ना तक मुश्किल हो गया। वाराणसी जाने वाले चौक निवासी रामलाल श्रीवास्तव ने बताया कि हर सप्ताह बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए बस से जाते हैं, लेकिन अब झूंसी तक पहुंचने का खर्च इतना बढ़ गया है कि आगे से ट्रेन से यात्रा करने का मन बना लिया है।

Prayagraj Civil Lines se Jhunsi shift bus station ke baad yatriyon ko auto aur e-rickshaw ke manmane kiraye dene pad rahe hain, bheed bhari city buses aur pareshan yatri.
Prayagraj Civil Lines se Jhunsi shift bus station ke baad yatriyon ko auto aur e-rickshaw ke manmane kiraye dene pad rahe hain, bheed bhari city buses aur pareshan yatri.

स्थिति का फायदा उठाकर बाइक सवार भी सक्रिय हो गए हैं। समय की मजबूरी में यात्रियों से 200 से 300 रुपये प्रति सवारी वसूले जा रहे हैं। बुजुर्गों, महिलाओं और बाहर से आने वाले यात्रियों को मजबूरी में यह रकम चुकानी पड़ रही है।

यात्रियों का कहना है कि झूंसी रोडवेज तक पहुंचने के लिए न तो पर्याप्त सिटी बसें उपलब्ध हैं और न ही कोई शटल सेवा शुरू की गई है। परिवहन साधनों की कमी के कारण निजी और अवैध रूप से सवारी ढो रहे वाहनों पर निर्भरता बढ़ गई है, जिसका सीधा असर यात्रियों की जेब पर पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों और यात्रियों ने प्रशासन से मांग की है कि सिविल लाइंस से झूंसी रोडवेज तक सिटी बसों, ई-बसों या शटल बस सेवा की संख्या तुरंत बढ़ाई जाए और ऑटो व ई-रिक्शा चालकों की मनमानी वसूली पर सख्त कार्रवाई की जाए।

इस बीच यूपी रोडवेज के क्षेत्रीय प्रबंधक रविंद्र कुमार सिंह ने बताया कि सिविल लाइंस से झूंसी के लिए ई-बसों की संख्या बढ़ाने की योजना है, ताकि यात्रियों को राहत मिल सके। वहीं रोडवेज कर्मचारी संघ ने डग्गामार बसों के संचालन पर सवाल उठाते हुए मांग की है कि यदि निजी बसें सिविल लाइंस से चल सकती हैं, तो रोडवेज बसों का संचालन भी शहर से ही किया जाए।

फिलहाल, स्थायी समाधान न होने तक झूंसी रोडवेज तक पहुंचना यात्रियों के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

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