उत्तर प्रदेश के प्रयागराज के श्री में गंगा के तट पर परम प्रभु ठाकुर हरित माधव मंदिर दारागंज पर इंटरनेशनल सेंटर आफ मेडिटेशन ट्रस्ट के स्वामी चेतन जी महाराज के द्वारा आज मेडिटेशन पर एक व्याख्यान मीडिया के समक्ष दिया गया उनके अनुसार प्रत्येक मनुष्य को वाहय यात्रा छोड़कर आंतरिक यात्रा पर जाकर स्वयं को समझना चाहिए, आत्मज्ञान का बोध होने से मनुष्य में समानता, समरसता, नैतिकता भावनात्मकता, के लक्षण उभरने लगते हैं मनुष्य अपनी इस काया को छोड़कर अंतर मन के ज्ञान से एकांतवास में जाकर अपनी परख स्वयं कर लेता है और उसी के परिपेक्ष में हमारा ध्यान हमें ईश्वर तक केंद्रित कर देता है यही जीवन का चक्र है…. सांसारिक मोह , माया ,बंधन नदी से मुक्त होकर ईश्वर की प्राप्ति ध्यान से ही हो सकती है..हमारा आशय है कि प्रत्येक व्यक्ति मैडिटेशन की ओर आकर्षित हो और अग्रसारित हो…. भारत की वर्तमान व्यवस्था पर भी उन्होंने टिप्पणी की व्यवस्था के अंदर अनुपालन और कार्यपालक को बहुत ज्यादा पारदर्शी होना चाहिए ताकि राजा अपने प्रजा के प्रति जवाब देह हो और प्रजा राजा के कार्यों से संतुष्ट हो समानता का भाव हो, एकरूपता हो तभी भारत का भविष्य, सुदृढ़ सुरक्षित और सांस्कृतिक बनेगा….
Date:



